टी.बी.क्या है, (TB)क्षयरोग के लक्षण, कारण और कैसे बचाव करें

विशेषज्ञों के अनुसार टी.बी.एक बैक्टीरिया से होती है यह बीमारी हवा के जरिए एक से दूसरे में फैलती है आज हम क्षयरोग रोग के लक्षण,  कारण और उसके बचाव के बारे में कुछ विशेष बातों चर्चा करेगे है आप नीचे दिए गए आर्टिकल में पूरी जानकारी पढ़ें |
टी.बी.का बैक्टीरिया आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होते हैं यह बैक्टीरिया बहुत ही खतरनाक और जानलेवा होते हैं पर आज के दिन टी.बी.का इलाज संभव है यदि टी.बी.का सही समय पर पता लग जाता है और तो टी.बी. से १००%  बचा जा सकता है |
टी.बी. का इलाज इंडियन गवर्नमेंट हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज होती हैं|  यह इलाज कम खर्चे में हो जाती है तो आप ध्यान से हमारे दिए गए आर्टिकल में दिए गए शुझाव कोऔर लक्षणों को पढ़े यहां पर डॉक्टरों द्वारा दिए गए सुझावों का कलेक्शन है|
जादातर टी.बी.फेफड़ों से शुरू होती है, और यह शरीर के अन्य भागों में भी हो सकती है जैसे कि-

  • ब्रेन,
  • यूटरस,
  • मुह
  • लीवर,
  • किडनी,
  • गला,
  • हड्डी आदि में टी.बी.के बैक्टीरिया हवा के जरिए एक से दूसरे शरीर में खेलते हैं
  • खांसने या सीखने के दौरान निकलने वाली बूंदे या हवा से भी इंफेक्शन होता है मरीज के पास बैठकर बात करने से भी आप को टी.बी.हो सकती है टी.बी. का बैक्टीरिया जिस हिस्से में होता है उस शरीर के हिस्से को पूरी तरह नष्ट कर देता है
  • यदि हड्डी में बैक्टीरिया हुआ तो हड्डी को गला देती है
  • ब्रेन में बैक्टीरिया हुआ तो दौड़े आते हैं,
  • लिवर में टी.बी.का बैक्टीरिया होने से पेट में पानी भर सकता है|

क्षयरोग के तीन प्रकार होते हैं पर तीनों के अलग-अलग लक्षण और इलाज होते हैं

  • पेट का टी.बी.पेट के अंदर बढ़ता है पेट में दर्द और दस्त जैसी सामान्य परेशानियां बनी रहती है| पेट के अंदर गांठ पड़ है खुशी है
  • फुफ्सीय टी.बीआदित्य गंभीर स्थिति होने पर पता चलता है इसके लक्षण प्रत्येक व्यक्ति में अलग अलग हो सकते हैं
  • हड्डी का टी.बी.पहचानने में आसान है क्योंकि हड्डी का टी.बी.होने से हड्डी में घाव हो जाना और इलाज कराने पर घाव ठीक ना होना यह टीवी का लक्षण हो सकता है
  • लंबे लंबे समय से खांसी आना – 2 हफ्तों से अधिक खांसी आने पर बलगम की जांच जरूर कराएं|
  • भूख में कमी आना – बिना कारण तेजी से वजन घटना रीड की हड्डी में और पैरों में और पीठ में दर्द होना|
  • बलगम और खांसी के साथ खून आना
  • रात में अधिक पसीना आना
  • शाम को बुखार होना और और लंबे समय तक बुखार आना और ठीक ना होना शरीर कमजोर होते जाना 1 महीने से अधिक सीने में दर्द होना सांस लेने में तकलीफ होना इत्यादि|

तो हम आप आज आपको एक जरुरी बात बताते हैं कि कैंसर या ब्रोंकाइटिस और टी.बी. के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं| ऐसे में आपको तय करने में थोड़ी असुविधा होती है|
तो हम आपको डॉक्टर के दिए गए सुझाव के अनुसार तीनों में अंतर बताता हूं
ब्राउन क्राइस्ट में सांस लेने में दिक्कत होती है और सांस लेते हुए सीटी जैसी आवाज आती है
कैंसर में मुंह से खून आना बजन कम होना जैसी दिक्कतें आमतौर पर बुखार नहीं आता हैं|
टी.बी. में सांस की दिक्कत नहीं होती है और बुखार आता है
टी.बी. के कारण –

  • टी.बी. स्पेशलिस्ट के अनुसार जो कुपोषित या स्वस्थ खाना हेल्दी फूड का सेवन नहीं करते हैं उनको टी.बी. होने का ज्यादा खतरा होता है क्योंकि टी.बी. किसी कमजोर यूनिटी पर प्रहार करती है इसके बैक्टीरिया शरीर के कमजोर होने के कारण तेजी से फैलते हैं|
  • अंधेरी और शीरण भरी जगह में ज्यादा खतरा रहता है टी.बी. के बैक्टीरिया ज्यादातर अंधेरे में पनपते हैं
  • गंदगी रहने और शुगर और एड्स जैसी बीमारी से भी टी.बी. हो जाती है
  • शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण टी.बी. हो सकती है
  • टी.बी. के मरीज के छीकने और खांसने से दूसरे स्वस्थ मनुष्य को भी संक्रमण कर देती है
  • जादा सिगरेट और शराब पीने से संक्रमण हो जाता हैं

इसका का इलाज टी.बी. शरीर के जिस हिस्से में है उसके अनुसार टेस्ट होता है
फेफड़ों की संक्रमण में बलगम जांच होती है जो कि 100 से ₹200 तक में हो जाती है सरकारी अस्पतालों में डॉट सेंटर पर यह फ्री की जाती है बलगम का टेस्ट लगभग 3 दिन लगातार होती है इसमें जांच में अच्छी तरह खास कर सुबह का जो बलगम है उस बलगम का टेस्ट होता है बलगम में टी.बी. पकड़ में ना आए तो AFB कल्चर टेस्ट कराना होता है यह ₹2000 तक में होता है इसकी रिपोर्ट 6 हफ्तों में आती है
टी.बी. का इलाज मुमकिन है इसका इलाज का कोर्स ६ महीने से १ साल  या उससे भी ज्यादा होता है इस में दिए गए कोर्स की दवाइयों को टाइम पर लेना होता है यदि दवाई बीच में बंद कर देते हैं तो यह बीमारी ठीक नहीं होती है और तेजी से फैलती है तो कृपया टीवी की दवाइयां पूरे कोर्स होने के बाद ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार बंद करें|
सरकारी केंद्रों में टीवी बीमारी का इलाज डॉट्स कार्यक्रम चलाया जाता है डॉट्स की फुल फॉर्म डायरेक्ट ऑब्जरवेशन ट्रीटमेंट यह इलाज मुक्त किया जाता है तो इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि आप को टी.बी. के इलाज के दौरान बीच में दवा बंद नहीं करना है तभी इसका इलाज संभव है
टी.बी. बीमारी होने पर आप क्या चीजें ज्यादा खाएं|

  • आप अच्छा और पौष्टिक भोजन का खाए जो शरीर के प्रति दो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होती है शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता टी.बी. जैसी अनेक संक्रमण रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है
  • आप हरी और पत्तेदार अधिक सब्जियां खाएं खाना जैतून के तेल से बना हुआ खाना चाहिए
  • साबुत और अंकुरित अनाज और बीजों को जैसे चना, जो वह आदि का यूज़ करना चाहिए जिन फलों और सब्जियों में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है उसे खाना चाहिए |
  • टीबी में लहसुन का सेवन भी बहुत लाभकारी है। यदि एक महीने तक लहसुन की दो-तीन कलियां रोज सुबह कच्ची ही चबा ली जाएं तो रोग शरीर से पूरी तरह निकल जाएगा।
  • प्रोटीन वाला खाना अधिक खाए जैसे – मछली, मांश, अंडा, सोयाबीन और दाले

टी.बी. होने पर क्या नहीं खाना चाहिए –

  • टी.बी. के बीमारी को परहेज करना भी बहुत जरूरी होता है टी.बी. के मरीज को शराब नहीं पीनी  चाहिए
  • तंबाकू खैनी गुटखा और पान के मसाले ना खाएं
  • ऑयली,  फ़ास्ट, जंक फूड गलती से कभी ना खाएं
  • चाय-काफी और सोडा का सेवन बिल्कुल ना करें|

टी.बी. के कुछ बचने के उपाय आप का साफ सुथरा बाथरूम होना चाहिए
यदि आप बाहर जूस या पानी पीते हैं तो डिस्पोजल ग्लास का इस्तेमाल करना चाहिए, सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए|
खाना खाने से पहले हाथ को एंटीबैक्टीरियल साबुन से धोना चाहिए यदि आपके घर में कोई टी.बी. का मरीज है तो उसके सामान को यूज ना करें जैसे तोलिया, बर्तन, बिस्तर, कपड़े इत्यादि | रोजाना आधे घंटे तक एक्सरसाइज जरूर करें बाहर का ज्यादा खाना खाने से बचें|
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