टीबी के कारण, लक्षण, निदान, जाँच, इलाज और बचाव

कहने वाले ने सही ही कहा हैपहला सुख निरोगी काया. शरीर स्वस्थ है तो मन अपने आप स्वस्थ रहेगा| हमारे शरीर को कई तरह की बीमारियाँ घेरे रहती है जिनमे कुछ घातक होती है तो कुछ सामान्य, आज हम ऐसी ही एक गंभीर बीमारी के बारे में जानेंगे जिसका नाम है टीबी|

टीबी बहुत ही घातक और संक्रामक रोग है जो की माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होता है| टीबी का असर ज्यादातर फेफड़ों पर होता है लेकिन यह शरीर के किसी भी भाग को प्रभावित कर सकता है|  

यह बीमारी हवा के जरिये एकदुसरे में फैलती है| टीबी गला, लीवर, कीडनी, ब्रेन, मुहं किसी भी हिस्से में हो सकती है| जैसा की हमने बताया है की टीबी एक संक्रामक रोग है, ऐसे में अगर आप किसी टीबी के मरीज के पास बैठकर बात कर रहे है, तो आपको भी इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है|

टीबी  बहुत ही खतरनाक बीमारी है और हर साल कई लोग इसकी चपेट में आकर मौत के शिकार हो जाते है| हालाँकि सही टाइम पर इलाज करने से इस बीमारी से बचा भी जा सकता है| आईये जानते है टीबी के कारण, लक्षण, जांच, निदान, इलाज और बचाव के उपायों के बारे में.

टीबी के कारण

टीबी के ज्यादातर होने का कारण संक्रमण है, अगर आप टीबी के मरीज के पास जायेंगे तो उसके खांसने, छींकने से जीवाणु हवा में फैलते है और इससे आप भी इसकी चपेट में सकते है| टीबी के मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों में भी इस बीमारी के होने का खतरा रहता है|

गर्भावस्था, कुपोषण, रेडियोथेरेपी, सिर या गले का कैंसर, शुगर आदि भी टीबी के कारण हो सकते है| इसके आलावा अधिक धुम्रपान, शराब का सेवन, साफ़सफाई ना रखना, टीबी के मरीज के साथ रहना, उसकी वस्तुओं का प्रयोग करने आदि भी टीबी  के कारण हो सकते है

टीबी हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है, जिससे शरीर इसकी चपेट में ज्यादा जाता है| सही समय पर इलाज नहीं मिलना मौत को दावत देता है|आईये जानते है टीबी के लक्षणों के बारे में|

टीबी के लक्षण

हर बीमारी की तरह इस गंभीर बीमारी के भी कुछ लक्षण है, जिससे हम इस रोग की पहचान कर सकते है|आईये जानते है टीबी के लक्षणों के बारे में|

  • कफ
  • लगातार लम्बे समय से खांसी आना
  • वजन में गिरावट
  • थकान महसूस होना 
  • रात में पसीना आना 
  • भूख की कमी 
  • सांस लेने में दिक्कत होना 
  • ठंड लगना 
  • बुखार आना 
  • सीने में दर्द 
  • सांस फूलना 
  • खांसी के साथ खून आना 
  • पेट में दर्द 
  • उलटी और दस्त

टीबी के प्रकार 

  1. पल्मोनरी टीबी :- यह टीबी का एक प्रकार होता है। जिसमे टीबी का जीवाणु फेफड़ो को संक्रमित करता है।
  2. एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी :- यह टीबी का दूसरा प्रकार होता है। जिसमे टीबी का जीवाणु फेफड़ो की जगह शरीर के अन्य जगह को प्रभावित करता है।

टीबी की जांच 

टीबी की जांच में मरीज के बलगम को जांचा जाता है| जिसकी जांच माइक्रोस्कोप के द्वारा की जाती है, बलगम खांसकर लिया जाता है| माइक्रो स्कोप के द्वारा जांच करने में 2 से 3 घंटे लगते है| इसी जांच के आधार पर डॉक्टर इलाज शुरू कर देता है| लेकिन इसकी जांच और रिजल्ट में काफी टाइम लग जाता है|

इसलिए डॉक्टर इसके आलावा नवीनतम जीन एक्सपर्ट तकनीक का सहारा लेते है| जिसमे महज 4 से 5 घंटो में ही इसकी जांच जाती है| इससे यह पता लगाया जा सकता है, की टीबी किस लेवल की है और दवा असर करेगी या नहीं|

कई बार छाती का एक्सरे भी किया जाता है,अगर टीबी कीडनी से रिलेटेड हो तो यूरीन की जांच भी की जाती है| कई बार सिटी स्कैन भी कराया जा सकता है| यह सारी जांचे बीमारी के लेवल को ध्यान में रखकर की जाती है|  

टीबी का उपचार 

टीबी के उपचार में सबसे पहले इसके जीवाणु को मारने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती है, इसका उपचार कई महीनों तक चलता है| टीबी की बीमारी में आम दवाएं असर नहीं करती है| टीबी की दवाइयों को बीच में छोड़ देने से इसका इलाज काफी मुश्किल हो जाता है, बीमारी की शुरूआती दौर में अगर इसका इलाज करा दिया जाता है तो टीबी कण्ट्रोल में जाती है|

इसमें मरीज खूब व्यायाम करें, अच्छा खाना खाएं, ध्यान लगायें, अच्छा सोचे, योग करें, खुद का ख्याल रखें, पर्याप्त नींद ले, फलफ्रूट खाएं और सामान्य जिंदगी जीयें, कहते भी है ना की बचाव ही हर बीमारी का इलाज है, इसलिए जितना हो सके खुद का ध्यान रखें|

टीबी से बचाव के उपाय

  • अपने इम्युनिटी सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत रखें|
  • पौष्टिक खाना खाएं|
  • शराब और धुम्रपान से बचें|
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें
  • टीबी के मरीजों से दूर रहे, अगर मिलना भी हो तो दूर रहे और मास्क पहने|
  • मरीज को हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रखना चाहिए|
  • खांसने और छींकने के दौरान मुहं पर नेपकीन रखें|
  • मरीज का कमरा साफ़ होना चाहिए|
  • मरीज पब्लिक शौच को यूज़ करने से बचें|
  • टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ और टेस्ट करवाएं|
  • डॉक्टर के द्वारा दी गई दवाइयों को समय पर ले|
  • अच्छा सोचें, अच्छा खाएं और सामान्य जीवन जीयें|

टीबी के बारे में विशेष जानकारी 

  • भारत में हर साल 20 लाख से ज्यादा लोग टीबी की चपेट में आते है|
  • इसमें से हर साल 5 लाख लोग मर जाते है|
  • अन्य देशों की तुलना में भारत में टीबी के मरीज सबसे ज्यादा है
  • दुनिया के 30 प्रतिशत टीबी के रोगी भारत में पाए जाते है|
  • समय पर टीबी का इलाज नहीं मिल पाना मौत को दावत देता है|
  • कई बार टीबी अपने लक्षणों के बिना भी हो सकती है|
  • ज्यादातर लोगों को टीबी के शुरूआती स्टेज में इसके बारे में पता ही नहीं चल पाता है|

सबसे बड़ी और ख़ास बात बचाव ही टीबी का इलाज है, इसलिए जितना हो शरीर को जिस चीज की जरूरत हो उसका ही सेवन करें, उम्मीद करता हु की आपको इस पोस्ट से टीबी के बारे में पर्याप्त जानकारी मिल गयी होगी और अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें|

Author Bio:- मेरा नाम विशाल है, में khabarinhindi.com पर कई दिनों से blogging कर रहा हूँ। जो एक बहुत ही प्रसिद्ध हिंदी ब्लॉग है। जिसमे स्वास्थ और फिटनेस से संबधित जानकारी बहुत ही आसान तरीके से समझाई गई है। यह जानकारी आप के अच्छे स्वास्थ के लिए बहुत ही लाभकारी हो सकती है।

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