ब्रेन ट्यूमर(Brain Tumor) के लक्षण, कारण, चिकित्सा और बचाव के उपाय की पूरी जानकारी

आपके सिर में प्रतिदिन दर्द की शिकायत रहती है जो कुछ दवाओं को लेने के बाद कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है और इसके बाद फिर से दर्द शुरू हो जाता है तो यह एक ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है यह ब्रेन ट्यूमर बहुत ही खतरनाक बीमारी है यदि इसका सही समय पर जानकारी हो जाती है तो इस बीमारी का इलाज संभव है
हमारे मस्तिष्क को आवरण में रखने वाली खोपड़ी बेहद कठोर होती है और मस्तिष्क सीमित स्थान के भीतर स्थित होती है यदि इसके भीतर कोई असामान्य कोशिकाओ का विकास होने लगया है तो समस्या बढ़ने लगती हैं जिसके कारण  दूसरी कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं|
ब्रेन ट्यूमर अनुवांशिक भी हो सकता है या जादा रेडिएशन में रहने पर या केमिकल के संपर्क में रहने से यह रोग हो जाता है ब्रेन ट्यूमर को उसके शुरुआती लक्षणों से पहचाना जा सकता है-

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण

  • सिर दर्द
  • उल्टी और मितली
  • शरीर का असंतुलन
  • दौरा पड़ना
  • पैरालिसिस जैसा महसूस होना
  • बोलने में परेशानी
  • चिड़चिड़ापन और स्वभाव में परिवर्तन
  • सुनने में समस्या होना
  • हाथ पैरों में ऐंठन कमजोरी का अहसास होना
  • आंखों में परेशानी
  • चेहरे के एक भाग से मुस्कुराना या पलक का लपक जाना
  • तालमेल में परेशानी
  • बोलने में दिक्कत
  • शरीर का वजन बढ़ना भी एक ब्रेन ट्यूमर का संकेत है

ब्रेन ट्यूमर के प्रकार

  1. बिना बिना कैंसरयुक्त ब्रेन ट्यूमर – यह धीरे-धीरे बढ़ता है और इलाज हो जाने के बाद दोबारा होने की संभावनाएं कम होती है|
  2. कैंसरयुक्त ब्रेन ट्यूमर यह प्राथमिक ट्यूमर के रूप में मस्तिष्क में शुरू होता है और धीरे-धीरे मस्तिष्क के अन्य भागों में फैलताजाता है इसका इलाज होने के बाद दोबारा होने की संभावना रहती हैं|

ब्रेन ट्यूमर की अवस्था- इसे 4 स्टेज में बाँटा गया है अंतिम स्टेज खतरनाक होता है-
स्टेज-१ – ब्रेन कैंसर कि यह वह नॉर्मल स्थित होती है इसमें कोशिकाओं का विकास धीरे-धीरे होता है, और यह दिमाग के दूसरे हिस्से में नहीं फैलता है इस स्टेज में आसानी से सर्जरी के जरिए खोपड़ी को खोलकर हटाया जा सकता है या कीमोथैरेपी और रेडिएशन थैरेपीके जरिए इसका इलाज संभव है
स्टेज २- ब्रेन कैंसर की इस स्थिति में ब्रेन के घातक सेल्स शरीर के दूसरे अन्य हिस्सों में फैलने लगते हैं यदि इसका सही समय से इलाज नहीं हुआ तो ट्यूमर बढ़ता रहता है इसका भी इलाज कीमोथैरेपी के जरिए इस अवस्था में इलाज संभव है
स्टेज ३- इस स्थिति में ब्रेन ट्यूमर चरम सीमा पर होता हैं और आक्रामक का रुप ले लेता हैं, घातक कैंसर सेल्स तेजी से शरीर के दुसरे हिस्सों में नुकसान पहुंचाने लगते हैं जिससे दिमाग को शरीर के अंगों को पहचानने में दिक्कत होने लगती है अर्थात शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है और बुखार और उल्टी लगातार होने लगती है इस स्टेज में भी इलाज संभव है इसका इलाज रेडिएशन थेरेपी के जरिए किया जा सकता है
स्टेज ४- यह का आखिरी स्टेज अवस्था में होता है इसमें ट्यूमर पूरी तरह विकसित हो जाता है और शरीर को पूरी तरह से क्षति पहुंचाने लगता है इसके घातक ऊतकों की पहचान मेडिकल जांच के द्वारा भी मुश्किल हो जाता हैं| इसका इलाज कीमोथैरेपी, रेडिएशन थेरेपी और लेजर थेरेपी द्वारा इस स्टेज का इलाज के लिए सुझाव दिया जाता है|
ब्रेन ट्यूमर के कारण- शोधकर्ताओं और अध्ययन से अभी तक ब्रेन ट्यूमर का सही से जानकारी नहीं हो पाई है किस कारण ब्रेन ट्यूमर होता है-

  • बढ़ती हुई उम्र के कारण ब्रेन ट्यूमर होने की संभावना अधिक होती है
  • किसी हानिकारक किरणों का प्रभाव से भी ब्रेन ट्यूमर हो सकता है
  • टेलीफोन या तेज ध्वनि प्रदूषण के कारण भी ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ता है
  • यदि किसी परिवार के सदस्य में पहले ब्रेन ट्यूमर रहा होगा तो उसके आगे की पीढ़ी में ब्रेन ट्यूमर होने की संभावना बनी रहती है
  • पहले किसी कारण कैंसर होने की वजह से भी ब्रेन ट्यूमर हो सकता है
  • एचआईवी एड्स के कारण भी ब्रेन ट्यूमर की संभावना होती हैं

ब्रेन ट्यूमर का परीक्षण-
न्यूरोलॉजी परीक्षण के तहत डॉक्टर आपकी दृष्टि, सुनने की शक्ति, मांसपेशियों की ताकत और आंखों का मस्तिष्क से जुड़ने वाली तंत्रकाये काम पर ट्यूमर के कारण हुई सूजन को देखने के लिए की जांच करता है|

  • एमआरआई- यह एक मशीन है जो कंप्यूटर से जुड़ा हुआ होता है इसके उपयोग से सिर के अंदर के हिस्से का विचित्र चित्र लिया जाता है और मस्तिष्क के चित्रों में अंतर देखने में मदद करता है इस चित्र से मस्तिक के सामान्य क्षेत्रों जैसे ट्यूमर को देखा जाता हैं|
  • सीटी स्कैन- यह भी कंप्यूटर से जुड़ी मशीन है इसमें एक्स रे लेते हैं| अंदरूनी सिर के कई चित्र एक्स-रे द्वारा लिए जाते हैं इससे भी ब्रेन ट्यूमर का पता लगाया जा सकता है
  • एंजियोग्राम: इसमें रक्त वाहिकाओं में इंजेक्शन के माध्यम से डाई के द्वारा मस्तिष्क का एक्स-रे किया जाता है। यदि मस्तिष्क में कोई ट्यूमर मौजूद है, तो एक्स-रे में ट्यूमर को देखा जा सकता है।
  • रीढ़ की हड्डी में छेद करके- चिकित्सक रीढ़ के नीचे की हड्डी में एक तरल पदार्थ को निकालकर उसका प्रयोगशाला में परीक्षण करते हैं
  • बायोप्सी: ट्यूमर कोशिकाओं को देखने के लिए ऊतकों की जाँच की प्रक्रिया को ‘बायोप्सी’ कहा जाता है। जांचकर्ता (पैथलॉजिस्ट) माइक्रोस्कोप के द्वारा इन कोशिकाओं को देखते हैं। बायोप्सी के द्वारा कैंसर, ऊतकों में परिवर्तन (जो कि कैंसर हो सकता है) और अन्य संबंधित स्थितियां देखी जा सकती है।

ब्रेन ट्यूमर का उपचार- ब्रेन ट्यूमर निम्न बातों पर निर्भर करता है —-

  • ट्यूमर के प्रकार मस्तिक में ट्यूमर की स्थिति उसका आकार कोशिकाओं कितनी असम्मान हुई है
  • आपके स्वस्थ हुआ फिटनेस का स्तर कैसा है
  • वह कितना फैल चुका है
  • यदि ब्रेन ट्यूमर की स्टेज 1 है तो इसको सर्जरी करके हानिकारक कोशिकाओं को निकाल दिया जाता है

विक्रम उपचार (Radiation Therapy)- विक्रम चिकित्सा में उच्च ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है और ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है यह शरीर के बाहरी हिस्से पर मशीन के माध्यम से किया जाता है
बाहरी बीन विक्रम विकरण (External beam radiotherapy)- उपचार के दौरान मस्तिष्क के उस हिस्से का उपचार होता है जहां ट्यूमर स्थित होता है
कीमोथेरेपी(Chemotherapy)- ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कीमोथैरेपी की का उपचार किया जाता है यह दवाइयों के रूप में गोलियां और इंजेक्शन के माध्यम से लिया जाता है
अगर आपकी परिवार में या पड़ोस में या आपको कोई भी इस लक्षण से पीड़ित है तो घबराएं नहीं अच्छे डॉक्टर को दिखाएं और इलाज में देरी ना करे| आप अपने शहर में नजदीकी न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाकर सलाह ले सकते हैं या फिर आप अपने मोबाइल से Google में जाकर best neurologist in Delhi या अपने कोई भी सिटी का नाम डालकर सर्च करें| सर्च रिजल्ट पर क्लिक करें और वहां से अच्छे डॉक्टर देखें और अपॉइंटमेंट बुक करें| यह सुविधा एक क्रेजीहेल्थ(Credihealth) website के माध्यम से आजकल दी जा रही है यह बहुत ही लोकप्रिय वेबसाइट है आप इस वेबसाइट के माध्यम से किसी भी शहर में टॉप के अस्पतालों में न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर की पूरी जानकारी ले सकते हैं और उनसे मिलने का समय घर बैठे बुक कर सकते हैं|
हमने आप को Brain Tumor in Hindi में जानकारी दी हैं| यह जानकारी इन्टरनेट से रिसर्च की हैं जो न्यूरोलॉजिस्ट विशेषज्ञों द्वारा राय दी गई हैं|

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